फिर कभी

गलियों में शोर होगा,
शायद कहीं और होगा,
मोहब्बत करेंगे फिर कभी,
आज ना सही,
फिर कभी सही,
पर हाथ पकड़ कर चलना,
बारिश में सूरज को देखने के लिए,
आसमाँ में,
अपने नाम वाला काग़ज़ कहीं और होगा ।

गद्दों में लग गयी है थोड़ी सी फ़ंगस,
कल सुबह ध्यान से धूप दिखा देंगे,
आज यूँ ही सो जाते हैं,
कल सुबह दीवारों से मकड़ी के जाले हटा देंगे ।

कुछ कहानियों को अधूरा रहने दो,
यूँ ही ठीक हैं ये कहानियाँ,
थोड़ी मोहब्बत कल की थी,
थोड़ी आज की है,
थोड़ी फिर कभी करेंगे,
बस हाथ पकड़ कर चलना,
कुछ दिन बचे हैं सूरज डूबने को,
तब तक नींद वाला चमचमाता चाँद कहीं और होगा ।

 
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